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mahabharat 1.130.25: उन राजकुमारों से ऐसा कहकर शत्रुओं को दबाने वाले द्रोण ने अपनी अंगूठी उस सूखे कुएँ में डाल दी।   |   mahabharat अध्याय 1.130: द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी गुल्ली और अँगूठीको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 130: द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी गुल्ली और अँगूठीको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.130.25 
एवमुक्त्वा कुमारांस्तान् द्रोण: स्वाङ्गुलिवेष्टनम्।
कूपे निरुदके तस्मिन्नपातयदरिंदम:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
उन राजकुमारों से ऐसा कहकर शत्रुओं को दबाने वाले द्रोण ने अपनी अंगूठी उस सूखे कुएँ में डाल दी।
 
Having said this to those princes, Drona, that subduer of enemies, cast his ring into that dry well.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)