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mahabharat 1.130.23: 'अहा! धिक्कार है तुम्हारे क्षत्रिय बल को और धिक्कार है तुम्हारी शस्त्र विद्या में निपुणता को, क्योंकि भरतवंश में उत्पन्न होकर भी तुम कुएँ में गिरे हुए कंचे को भी नहीं निकाल सकते॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 1.130: द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी गुल्ली और अँगूठीको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 130: द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी गुल्ली और अँगूठीको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.130.23 
अहो वो धिग् बलं क्षात्रं धिगेतां व: कृतास्त्रताम्।
भरतस्यान्वये जाता ये वीटां नाधिगच्छत॥ २३॥
 
 
अनुवाद
'अहा! धिक्कार है तुम्हारे क्षत्रिय बल को और धिक्कार है तुम्हारी शस्त्र विद्या में निपुणता को, क्योंकि भरतवंश में उत्पन्न होकर भी तुम कुएँ में गिरे हुए कंचे को भी नहीं निकाल सकते॥ 23॥
 
'Oh! Shame on your Kshatriya prowess and shame on your expertise in the art of weapons because despite being born in the Bharata dynasty, you are unable to take out a marble that has fallen in a well.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)