Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.130.22: तत्पश्चात् पराक्रमी द्रोण ने यह देखकर कि इन राजकुमारों का अभीष्ट कार्य पूरा नहीं हुआ है और ये उसी उद्देश्य से मेरे पास आये हैं, बड़ी चतुराई और मृदु मुस्कान के साथ कहा -॥22॥ | mahabharat अध्याय 1.130: द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी गुल्ली और अँगूठीको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात् पराक्रमी द्रोण ने यह देखकर कि इन राजकुमारों का अभीष्ट कार्य पूरा नहीं हुआ है और ये उसी उद्देश्य से मेरे पास आये हैं, बड़ी चतुराई और मृदु मुस्कान के साथ कहा -॥22॥
Thereafter the valiant Drona, seeing that the desired task of these princes had not been accomplished and that they had come to me for the same purpose, spoke with great dexterity and a gentle smile -॥ 22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥