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mahabharat 1.130.21: उस श्रेष्ठ ब्राह्मण को देखकर वे सभी कुमार उसके पास गए और उसे घेर लिया। उनका उत्साह नष्ट हो गया। किसी भी काम में उनकी इच्छा नहीं हुई। उनके हृदय महान निराशा से भर गए ॥21॥   |   mahabharat अध्याय 1.130: द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी गुल्ली और अँगूठीको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 130: द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी गुल्ली और अँगूठीको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.130.21 
ते तं दृष्ट्वा महात्मानमुपगम्य कुमारका:।
भग्नोत्साहक्रियात्मानो ब्राह्मणं पर्यवारयन्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
उस श्रेष्ठ ब्राह्मण को देखकर वे सभी कुमार उसके पास गए और उसे घेर लिया। उनका उत्साह नष्ट हो गया। किसी भी काम में उनकी इच्छा नहीं हुई। उनके हृदय महान निराशा से भर गए ॥21॥
 
On seeing that great Brahmin, all those Kumaras went to him and surrounded him. Their enthusiasm was broken. They did not feel like doing any work. Their hearts were filled with great despair. ॥21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)