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mahabharat 1.130.19: इससे वे शर्म से सिर झुकाकर एक-दूसरे को देखने लगे। वे बहुत चिंतित हो गए क्योंकि उन्हें कंचे हटाने का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था।   |   mahabharat अध्याय 1.130: द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी गुल्ली और अँगूठीको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 130: द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी गुल्ली और अँगूठीको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.130.19 
ततोऽन्योन्यमवैक्षन्त व्रीडयावनतानना:।
तस्या योगमविन्दन्तो भृशं चोत्कण्ठिताभवन्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
इससे वे शर्म से सिर झुकाकर एक-दूसरे को देखने लगे। वे बहुत चिंतित हो गए क्योंकि उन्हें कंचे हटाने का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था।
 
Due to this they bowed their heads in shame and started looking at each other. They became very anxious as they could not find any way to remove the marbles.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)