श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 130: द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी गुल्ली और अँगूठीको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  1.130.16-17 
एवं स तत्र गूढात्मा कंचित् कालमुवास ह।
कुमारास्त्वथ निष्क्रम्य समेता गजसाह्वयात्॥ १६॥
क्रीडन्तो वीटया तत्र वीरा: पर्यचरन् मुदा।
पपात कूपे सा वीटा तेषां वै क्रीडतां तदा॥ १७॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार द्रोण कुछ समय तक वहाँ छिपकर रहे। तत्पश्चात् एक दिन कौरवों और पाण्डवों के सभी वीर पुत्र हस्तिनापुर से निकलकर वहाँ आनन्दपूर्वक गुल्ली-डंडा खेलने लगे। खेलते-खेलते उन पुत्रों की गुल्ली कुएँ में गिर गई॥16-17॥
 
In this way Drona lived there for some time hiding himself. Thereafter one day all the brave sons of Kauravas and Pandavas came out of Hastinapur and happily started playing gulli-danda there. While they were playing the game, the gulli of those sons fell into the well.॥16-17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)