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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 130: द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी गुल्ली और अँगूठीको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना
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श्लोक 14
श्लोक
1.130.14
स नागपुरमागम्य गौतमस्य निवेशने।
भारद्वाजोऽवसत् तत्र प्रच्छन्नं द्विजसत्तम:॥ १४॥
अनुवाद
हस्तिनापुर पहुँचकर द्विजों में श्रेष्ठ द्रोण गौतमगोत्रीय कृपाचार्य के घर में गुप्त रूप से रहने लगे ॥14॥
After reaching Hastinapur, Drona, the best among the dwijs, started living secretly in the house of Gautam gotriya Kripacharya. 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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