Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.130.12-13: वैशम्पायन कहते हैं - जनमेजय! राजा द्रुपद की यह बात सुनकर महाबली द्रोण क्रोध से भर गए और दो घड़ी तक गहन चिंतन में डूबे रहे। वे बुद्धिमान थे, अतः उन्होंने मन ही मन पांचाल नरेश से बदला लेने का निश्चय किया और कौरवों की राजधानी हस्तिनापुर पहुँचे।   |   mahabharat अध्याय 1.130: द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी गुल्ली और अँगूठीको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 130: द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी गुल्ली और अँगूठीको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  1.130.12-13 
वैशम्पायन उवाच
द्रुपदेनैवमुक्तस्तु भारद्वाज: प्रतापवान्।
मुहूर्तं चिन्तयित्वा तु मन्युनाभिपरिप्लुत:॥ १२॥
स विनिश्चित्य मनसा पाञ्चालं प्रति बुद्धिमान्।
जगाम कुरुमुख्यानां नगरं नागसाह्वयम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं - जनमेजय! राजा द्रुपद की यह बात सुनकर महाबली द्रोण क्रोध से भर गए और दो घड़ी तक गहन चिंतन में डूबे रहे। वे बुद्धिमान थे, अतः उन्होंने मन ही मन पांचाल नरेश से बदला लेने का निश्चय किया और कौरवों की राजधानी हस्तिनापुर पहुँचे।
 
Vaishampayana says - Janamejaya! On hearing this from King Drupada, the mighty Drona was filled with anger and was lost in deep thought for two hours. He was intelligent, so he decided in his mind to take revenge from the Panchala king and went to Hastinapur, the capital of the Kauravas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)