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mahabharat 1.130.10: समान धन और समान शिक्षा वाले ही मित्रता और विवाह-संबंध रख सकते हैं। स्वस्थ और दुर्बल (धनी और निर्धन) में कभी मित्रता नहीं हो सकती।॥10॥   |   mahabharat अध्याय 1.130: द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी गुल्ली और अँगूठीको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 130: द्रोणका द्रुपदसे तिरस्कृत हो हस्तिनापुरमें आना, राजकुमारोंसे उनकी भेंट, उनकी गुल्ली और अँगूठीको कुएँमेंसे निकालना एवं भीष्मका उन्हें अपने यहाँ सम्मानपूर्वक रखना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.130.10 
ययोरेव समं वित्तं ययोरेव समं श्रुतम्।
तयोर्विवाह: सख्यं च न तु पुष्टविपुष्टयो:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
समान धन और समान शिक्षा वाले ही मित्रता और विवाह-संबंध रख सकते हैं। स्वस्थ और दुर्बल (धनी और निर्धन) में कभी मित्रता नहीं हो सकती।॥10॥
 
Only those who have equal wealth and equal education can have friendship and marriage relations. There can never be friendship between the healthy and the weak (rich and poor).॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)