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mahabharat 1.13.9: शौनकजी! आस्तिक मुनिका की यह कथा समस्त पापों का नाश करने वाली है। चूँकि आपने पूछा है, इसलिए मैं इसका पूर्ण वर्णन कर रहा हूँ॥9॥   |   mahabharat अध्याय 1.13: जरत्कारुका अपने पितरोंके अनुरोधसे विवाहके लिये उद्यत होना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 13: जरत्कारुका अपने पितरोंके अनुरोधसे विवाहके लिये उद्यत होना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.13.9 
इदमास्तीकमाख्यानं तुभ्यं शौनक पृच्छते।
कथयिष्याम्यशेषेण सर्वपापप्रणाशनम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
शौनकजी! आस्तिक मुनिका की यह कथा समस्त पापों का नाश करने वाली है। चूँकि आपने पूछा है, इसलिए मैं इसका पूर्ण वर्णन कर रहा हूँ॥9॥
 
Shaunakji! This story of Aastik Munika destroys all sins. Since you asked, I am describing it in full.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)