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mahabharat 1.13.4-5h: उग्रश्रवाजी बोले - ब्रह्मन्! आस्तिक की कथा बहुत लम्बी है। हे वक्ताओं में श्रेष्ठ! जैसा कहा गया है, वैसा ही पूरा प्रसंग सुनो।॥4॥   |   mahabharat अध्याय 1.13: जरत्कारुका अपने पितरोंके अनुरोधसे विवाहके लिये उद्यत होना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 13: जरत्कारुका अपने पितरोंके अनुरोधसे विवाहके लिये उद्यत होना  »  श्लोक 4-5h
 
 
श्लोक  1.13.4-5h 
सौतिरुवाच
महदाख्यानमास्तीकं यथैतत् प्रोच्यते द्विज॥ ४॥
सर्वमेतदशेषेण शृणु मे वदतां वर।
 
 
अनुवाद
उग्रश्रवाजी बोले - ब्रह्मन्! आस्तिक की कथा बहुत लम्बी है। हे वक्ताओं में श्रेष्ठ! जैसा कहा गया है, वैसा ही पूरा प्रसंग सुनो।॥4॥
 
Ugrashravaji said - Brahman! The story of Astika is very long. O best of speakers! Listen to the entire episode as it is told. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)