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mahabharat 1.13.31: हे पिता! मैं सदैव इसी प्रकार और इसी प्रकार विवाह के लिए प्रयत्न करता रहूँगा। इसके विपरीत मैं कुछ भी नहीं करूँगा। 31॥   |   mahabharat अध्याय 1.13: जरत्कारुका अपने पितरोंके अनुरोधसे विवाहके लिये उद्यत होना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 13: जरत्कारुका अपने पितरोंके अनुरोधसे विवाहके लिये उद्यत होना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  1.13.31 
एवं दारक्रियाहेतो: प्रयतिष्ये पितामहा:।
अनेन विधिना शश्वन्न करिष्येऽहमन्यथा॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
हे पिता! मैं सदैव इसी प्रकार और इसी प्रकार विवाह के लिए प्रयत्न करता रहूँगा। इसके विपरीत मैं कुछ भी नहीं करूँगा। 31॥
 
O father! I will always keep trying for marriage in this manner and in this manner. I will not do anything contrary to this. 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)