Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.13.27: जरत्कारु बोले - हे पितामह! मैंने मन में निश्चय कर लिया था कि मैं जीवन के सुखों के लिए न तो स्त्री का वरण करूँगा और न ही धन का संचय करूँगा; किन्तु यदि ऐसा करने से आप सबका कल्याण होगा, तो मैं अवश्य विवाह करूँगा॥ 27॥ | mahabharat अध्याय 1.13: जरत्कारुका अपने पितरोंके अनुरोधसे विवाहके लिये उद्यत होना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जरत्कारुरुवाच
न दारान् वै करिष्येऽहं न धनं जीवितार्थत:।
भवतां तु हितार्थाय करिष्ये दारसंग्रहम्॥ २७॥
अनुवाद
जरत्कारु बोले - हे पितामह! मैंने मन में निश्चय कर लिया था कि मैं जीवन के सुखों के लिए न तो स्त्री का वरण करूँगा और न ही धन का संचय करूँगा; किन्तु यदि ऐसा करने से आप सबका कल्याण होगा, तो मैं अवश्य विवाह करूँगा॥ 27॥
Jaratkaru said - O great grandfather! I had decided in my mind that I would neither acquire a wife nor accumulate wealth for the sake of life's pleasures; but if doing so would be beneficial to you all, then I will certainly get married.॥ 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥