Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.13.24: पितरों ने कहा - पिताजी! हमारे कुल की संतति-परंपरा को कायम रखने के लिए आपको विवाह के लिए निरन्तर प्रयत्नशील रहना चाहिए। प्रभु! आपको अपने लिए, हमारे लिए अथवा धर्मपालन के लिए पुत्र-जन्म के लिए प्रयत्नशील रहना चाहिए।॥ 24॥ | mahabharat अध्याय 1.13: जरत्कारुका अपने पितरोंके अनुरोधसे विवाहके लिये उद्यत होना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पितर ऊचु:
यतस्व यत्नवांस्तात संतानाय कुलस्य न:।
आत्मनोऽर्थेऽस्मदर्थे च धर्म इत्येव वा विभो॥ २४॥
अनुवाद
पितरों ने कहा - पिताजी! हमारे कुल की संतति-परंपरा को कायम रखने के लिए आपको विवाह के लिए निरन्तर प्रयत्नशील रहना चाहिए। प्रभु! आपको अपने लिए, हमारे लिए अथवा धर्मपालन के लिए पुत्र-जन्म के लिए प्रयत्नशील रहना चाहिए।॥ 24॥
The ancestors said - Father! You should constantly strive for marriage to maintain the tradition of progeny of our clan. Lord! You should strive for the birth of a son for yourself, for us or for the sake of following the religion.॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥