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mahabharat 1.13.23: जरत्कारु बोले- हे महात्माओं! आप लोग मेरे पितामह और पूर्वज हैं। मैं स्वयं जरत्कारु हूँ। कहिए, आज मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूँ?॥23॥   |   mahabharat अध्याय 1.13: जरत्कारुका अपने पितरोंके अनुरोधसे विवाहके लिये उद्यत होना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 13: जरत्कारुका अपने पितरोंके अनुरोधसे विवाहके लिये उद्यत होना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.13.23 
जरत्कारुरुवाच
मम पूर्वे भवन्तो वै पितर: सपितामहा:।
ब्रूत किं करवाण्यद्य जरत्कारुरहं स्वयम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
जरत्कारु बोले- हे महात्माओं! आप लोग मेरे पितामह और पूर्वज हैं। मैं स्वयं जरत्कारु हूँ। कहिए, आज मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूँ?॥23॥
 
Jaratkaru said— O Mahatmas! You are my grandfathers and forefathers. I myself am Jaratkaru. Tell me, what service can I do for you today?॥23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)