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mahabharat 1.13.19: हमारा एक पुत्र जीवित बचा है, जिसका नाम जरत्कारु है। हम अभागे लोगों का वह अभागा पुत्र केवल तपस्या में ही लगा हुआ है॥19॥   |   mahabharat अध्याय 1.13: जरत्कारुका अपने पितरोंके अनुरोधसे विवाहके लिये उद्यत होना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 13: जरत्कारुका अपने पितरोंके अनुरोधसे विवाहके लिये उद्यत होना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.13.19 
अस्माकं संततिस्त्वेको जरत्कारुरिति स्मृत:।
मन्दभाग्योऽल्पभाग्यानां तप एव समास्थित:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
हमारा एक पुत्र जीवित बचा है, जिसका नाम जरत्कारु है। हम अभागे लोगों का वह अभागा पुत्र केवल तपस्या में ही लगा हुआ है॥19॥
 
One of our progeny has survived, whose name is Jaratkaru. That unfortunate progeny of us unfortunate people is engaged only in penance.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)