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mahabharat 1.13.18: पितरों ने कहा - ब्रह्मन्! हम कठोर व्रतों का पालन करने वाले यायावर नामक ऋषि हैं। अपने वंश के नाश के कारण हम पृथ्वी पर गिरना चाहते हैं॥ 18॥   |   mahabharat अध्याय 1.13: जरत्कारुका अपने पितरोंके अनुरोधसे विवाहके लिये उद्यत होना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 13: जरत्कारुका अपने पितरोंके अनुरोधसे विवाहके लिये उद्यत होना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.13.18 
पितर ऊचु:
यायावरा नाम वयमृषय: संशितव्रता:।
संतानप्रक्षयाद् ब्रह्मन्नधो गच्छाम मेदिनीम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
पितरों ने कहा - ब्रह्मन्! हम कठोर व्रतों का पालन करने वाले यायावर नामक ऋषि हैं। अपने वंश के नाश के कारण हम पृथ्वी पर गिरना चाहते हैं॥ 18॥
 
The ancestors said - Brahman! We are sages named Yayavar who follow strict vows. Due to the destruction of our lineage, we want to fall down to the earth.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)