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mahabharat 1.13.17: जिस वृक्ष-स्तम्भ (तिनों का समूह जिसे खस कहते हैं) पर तुम लटके हुए हो, उसे इस बिल में छिपे हुए रहने वाले चूहे ने सब ओर से खा लिया है। ॥17॥ *   |   mahabharat अध्याय 1.13: जरत्कारुका अपने पितरोंके अनुरोधसे विवाहके लिये उद्यत होना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 13: जरत्कारुका अपने पितरोंके अनुरोधसे विवाहके लिये उद्यत होना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.13.17 
वीरणस्तम्बके लग्ना: सर्वत: परिभक्षिते।
मूषकेन निगूढेन गर्तेऽस्मिन् नित्यवासिना॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जिस वृक्ष-स्तम्भ (तिनों का समूह जिसे खस कहते हैं) पर तुम लटके हुए हो, उसे इस बिल में छिपे हुए रहने वाले चूहे ने सब ओर से खा लिया है। ॥17॥ *
 
"The tree-stambha (cluster of straws called khas) on which you are hanging has been eaten up from all sides by the rat that resides secretly in this hole." ॥17॥ *
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)