Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.13.14-15: वे कभी वायु का सेवन करते, कभी अन्न का पूर्णतया त्याग कर शरीर को सूखा रखते । उन महामुनि ने निद्रा पर विजय प्राप्त कर ली थी, इसलिए उन्हें नींद नहीं आती थी । इधर-उधर घूमते हुए वे प्रज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी प्रतीत हो रहे थे । घूमते-घूमते एक स्थान पर उन्हें अपने पूर्वज दिखाई दिए, जो एक विशाल गड्ढे में पैर ऊपर और सिर नीचे करके लटके हुए थे ॥14-15॥ | mahabharat अध्याय 1.13: जरत्कारुका अपने पितरोंके अनुरोधसे विवाहके लिये उद्यत होना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वे कभी वायु का सेवन करते, कभी अन्न का पूर्णतया त्याग कर शरीर को सूखा रखते । उन महामुनि ने निद्रा पर विजय प्राप्त कर ली थी, इसलिए उन्हें नींद नहीं आती थी । इधर-उधर घूमते हुए वे प्रज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी प्रतीत हो रहे थे । घूमते-घूमते एक स्थान पर उन्हें अपने पूर्वज दिखाई दिए, जो एक विशाल गड्ढे में पैर ऊपर और सिर नीचे करके लटके हुए थे ॥14-15॥
Sometimes he would drink air and sometimes he would completely abstain from food and keep his body dry. That great sage had conquered sleep and so he could not sleep. While roaming here and there, he appeared as radiant as a blazing fire. While roaming around, at one point he saw his forefathers who were hanging in a huge pit with their feet up and head down.॥14-15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥