Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.13.11-12: उनका नाम जरत्कारु था। वे एक महान ऋषि और महात्मा थे। यात्रियों में उनका स्थान सर्वोच्च था। वे धर्म के ज्ञाता थे। एक बार तप शक्ति से संपन्न जरत्कारु यात्रा पर निकले। ऋषिवत जीवन जीते हुए, वे जहाँ भी शाम होती, वहीं अपना डेरा डाल लेते थे। | mahabharat अध्याय 1.13: जरत्कारुका अपने पितरोंके अनुरोधसे विवाहके लिये उद्यत होना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उनका नाम जरत्कारु था। वे एक महान ऋषि और महात्मा थे। यात्रियों में उनका स्थान सर्वोच्च था। वे धर्म के ज्ञाता थे। एक बार तप शक्ति से संपन्न जरत्कारु यात्रा पर निकले। ऋषिवत जीवन जीते हुए, वे जहाँ भी शाम होती, वहीं अपना डेरा डाल लेते थे।
His name was Jaratkaru. He was a great sage and a great saint. His position was the highest among the travellers. He was a knower of religion. Once, Jaratkaru, who was blessed with the power of penance, started a journey. Living like a sage, he used to camp wherever the evening fell.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥