श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 129: कृपाचार्य, द्रोण और अश्वत्थामाकी उत्पत्ति तथा द्रोणको परशुरामजीसे अस्त्र-शस्त्रकी प्राप्तिकी कथा  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.129.9 
धनुश्च हि शरास्तस्य कराभ्यामपतन् भुवि।
वेपथुश्चापि तां दृष्ट्वा शरीरे समजायत॥ ९॥
 
 
अनुवाद
धनुष-बाण उसके हाथ से छूटकर भूमि पर गिर पड़े और उन्हें देखकर उसका शरीर काँप उठा।
 
The bow and arrow fell from his hands to the ground and on looking at them his body trembled.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)