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mahabharat 1.129.7: वह जनपद शरद्वान के सुन्दर आश्रम में जाकर धनुष-बाण धारण करने वाले गौतम को रिझाने लगी॥7॥   |   mahabharat अध्याय 1.129: कृपाचार्य, द्रोण और अश्वत्थामाकी उत्पत्ति तथा द्रोणको परशुरामजीसे अस्त्र-शस्त्रकी प्राप्तिकी कथा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 129: कृपाचार्य, द्रोण और अश्वत्थामाकी उत्पत्ति तथा द्रोणको परशुरामजीसे अस्त्र-शस्त्रकी प्राप्तिकी कथा  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.129.7 
सा हि गत्वाऽऽश्रमं तस्य रमणीयं शरद्वत:।
धनुर्बाणधरं बाला लोभयामास गौतमम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
वह जनपद शरद्वान के सुन्दर आश्रम में जाकर धनुष-बाण धारण करने वाले गौतम को रिझाने लगी॥7॥
 
She went to the beautiful ashram of Janpadi Sharadvan and started wooing Gautam who wielded bow and arrow. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)