vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 1: आदि पर्व
»
अध्याय 129: कृपाचार्य, द्रोण और अश्वत्थामाकी उत्पत्ति तथा द्रोणको परशुरामजीसे अस्त्र-शस्त्रकी प्राप्तिकी कथा
»
श्लोक 65
श्लोक
1.129.65
द्रोण उवाच
अस्त्राणि मे समग्राणि ससंहाराणि भार्गव।
सप्रयोगरहस्यानि दातुमर्हस्यशेषत:॥ ६५॥
अनुवाद
द्रोण बोले- भृगुनन्दन! आप मुझे समस्त अस्त्र-शस्त्रों का ज्ञान, उनके प्रयोग, रहस्य और संहार के तरीकों सहित प्रदान करें॥65॥
Drona said- Bhrigunandan! Please grant me the knowledge of all weapons including their uses, secrets and methods of destruction. 65॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×