श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 129: कृपाचार्य, द्रोण और अश्वत्थामाकी उत्पत्ति तथा द्रोणको परशुरामजीसे अस्त्र-शस्त्रकी प्राप्तिकी कथा  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  1.129.65 
द्रोण उवाच
अस्त्राणि मे समग्राणि ससंहाराणि भार्गव।
सप्रयोगरहस्यानि दातुमर्हस्यशेषत:॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
द्रोण बोले- भृगुनन्दन! आप मुझे समस्त अस्त्र-शस्त्रों का ज्ञान, उनके प्रयोग, रहस्य और संहार के तरीकों सहित प्रदान करें॥65॥
 
Drona said- Bhrigunandan! Please grant me the knowledge of all weapons including their uses, secrets and methods of destruction. 65॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)