श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 129: कृपाचार्य, द्रोण और अश्वत्थामाकी उत्पत्ति तथा द्रोणको परशुरामजीसे अस्त्र-शस्त्रकी प्राप्तिकी कथा  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  1.129.63 
शरीरमात्रमेवाद्य ममेदमवशेषितम्।
अस्त्राणि च महार्हाणि शस्त्राणि विविधानि च॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
अब मेरा केवल यह शरीर ही शेष है। इसके साथ ही नाना प्रकार के बहुमूल्य अस्त्र-शस्त्रों का ज्ञान भी शेष है। 63.
 
Now only this body of mine is left. Along with it, the knowledge of various types of precious weapons remains. 63.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)