vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 1: आदि पर्व
»
अध्याय 129: कृपाचार्य, द्रोण और अश्वत्थामाकी उत्पत्ति तथा द्रोणको परशुरामजीसे अस्त्र-शस्त्रकी प्राप्तिकी कथा
»
श्लोक 63
श्लोक
1.129.63
शरीरमात्रमेवाद्य ममेदमवशेषितम्।
अस्त्राणि च महार्हाणि शस्त्राणि विविधानि च॥ ६३॥
अनुवाद
अब मेरा केवल यह शरीर ही शेष है। इसके साथ ही नाना प्रकार के बहुमूल्य अस्त्र-शस्त्रों का ज्ञान भी शेष है। 63.
Now only this body of mine is left. Along with it, the knowledge of various types of precious weapons remains. 63.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×