Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.129.59-60: हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! आपका स्वागत है। आप जो चाहें, मुझसे कहिए। उनके इस प्रकार पूछने पर नाना प्रकार के धन और रत्नों का दान करने की इच्छा रखने वाले भारद्वाजपुत्र द्रोण ने योद्धाओं में श्रेष्ठ परशुरामजी से कहा - 'हे महान व्रतधारी महामुनि! मैं आपसे ऐसा धन मांगता हूँ जिसका कभी अंत न हो।'॥59-60॥ | mahabharat अध्याय 1.129: कृपाचार्य, द्रोण और अश्वत्थामाकी उत्पत्ति तथा द्रोणको परशुरामजीसे अस्त्र-शस्त्रकी प्राप्तिकी कथा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! आपका स्वागत है। आप जो चाहें, मुझसे कहिए। उनके इस प्रकार पूछने पर नाना प्रकार के धन और रत्नों का दान करने की इच्छा रखने वाले भारद्वाजपुत्र द्रोण ने योद्धाओं में श्रेष्ठ परशुरामजी से कहा - 'हे महान व्रतधारी महामुनि! मैं आपसे ऐसा धन मांगता हूँ जिसका कभी अंत न हो।'॥59-60॥
'O best of the Brahmins, you are welcome. Whatever you want, tell me.' On his asking in this manner, Bharadwaj's son Drona, who wanted to donate various kinds of wealth and precious stones, said to Parasurama, the best of warriors, - 'O great sage, who observes a great vow, I request you for such wealth which will never end.'॥ 59-60॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥