Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.129.54: महेन्द्र पर्वत पर पहुँचकर महातपस्वी द्रोण ने क्षमा, शम-दम आदि गुणों से युक्त शत्रुओं का नाश करने वाले भृगुनन्दन परशुरामजी को देखा ॥54॥   |   mahabharat अध्याय 1.129: कृपाचार्य, द्रोण और अश्वत्थामाकी उत्पत्ति तथा द्रोणको परशुरामजीसे अस्त्र-शस्त्रकी प्राप्तिकी कथा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 129: कृपाचार्य, द्रोण और अश्वत्थामाकी उत्पत्ति तथा द्रोणको परशुरामजीसे अस्त्र-शस्त्रकी प्राप्तिकी कथा  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  1.129.54 
ततो महेन्द्रमासाद्य भारद्वाजो महातपा:।
क्षान्तं दान्तममित्रघ्नमपश्यद् भृगुनन्दनम्॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
महेन्द्र पर्वत पर पहुँचकर महातपस्वी द्रोण ने क्षमा, शम-दम आदि गुणों से युक्त शत्रुओं का नाश करने वाले भृगुनन्दन परशुरामजी को देखा ॥54॥
 
After reaching Mahendra mountain, the great ascetic Drona saw Bhrigunandan Parshuramji, the destroyer of enemies with qualities like forgiveness, Sham-Dum etc. 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)