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mahabharat 1.129.53: तदनन्तर महातपस्वी महाबाहु द्रोणाचार्य ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करने वाले तपस्वी शिष्यों से घिरे हुए परम उत्तम महेन्द्र पर्वत पर गए ॥53॥   |   mahabharat अध्याय 1.129: कृपाचार्य, द्रोण और अश्वत्थामाकी उत्पत्ति तथा द्रोणको परशुरामजीसे अस्त्र-शस्त्रकी प्राप्तिकी कथा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 129: कृपाचार्य, द्रोण और अश्वत्थामाकी उत्पत्ति तथा द्रोणको परशुरामजीसे अस्त्र-शस्त्रकी प्राप्तिकी कथा  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  1.129.53 
तत: स व्रतिभि: शिष्यैस्तपोयुक्तैर्महातपा:।
वृत: प्रायान्महाबाहुर्महेन्द्रं पर्वतोत्तमम्॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर महातपस्वी महाबाहु द्रोणाचार्य ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करने वाले तपस्वी शिष्यों से घिरे हुए परम उत्तम महेन्द्र पर्वत पर गए ॥53॥
 
Then the great ascetic, the mighty-armed Drona, surrounded by ascetic disciples who followed the vow of celibacy, went to the most excellent Mahendra mountain. 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)