धनुर्वेदपरत्वाच्च तपसा विपुलेन च।
भृशं संतापयामास देवराजं स गौतम:॥ ५॥
अनुवाद
वे धनुर्वेद में पारंगत तो थे ही, उनकी तपस्या भी बहुत बड़ी थी; इसी कारण गौतम ने देवताओं के राजा इन्द्र को बड़ी चिंता में डाल दिया था ॥5॥
Not only was he well versed in the Dhanur Veda, his penance was also immense; due to this Gautama had put the king of gods Indra into great worry. ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥