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mahabharat 1.129.5: वे धनुर्वेद में पारंगत तो थे ही, उनकी तपस्या भी बहुत बड़ी थी; इसी कारण गौतम ने देवताओं के राजा इन्द्र को बड़ी चिंता में डाल दिया था ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 1.129: कृपाचार्य, द्रोण और अश्वत्थामाकी उत्पत्ति तथा द्रोणको परशुरामजीसे अस्त्र-शस्त्रकी प्राप्तिकी कथा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 129: कृपाचार्य, द्रोण और अश्वत्थामाकी उत्पत्ति तथा द्रोणको परशुरामजीसे अस्त्र-शस्त्रकी प्राप्तिकी कथा  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.129.5 
धनुर्वेदपरत्वाच्च तपसा विपुलेन च।
भृशं संतापयामास देवराजं स गौतम:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
वे धनुर्वेद में पारंगत तो थे ही, उनकी तपस्या भी बहुत बड़ी थी; इसी कारण गौतम ने देवताओं के राजा इन्द्र को बड़ी चिंता में डाल दिया था ॥5॥
 
Not only was he well versed in the Dhanur Veda, his penance was also immense; due to this Gautama had put the king of gods Indra into great worry. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)