| श्री महाभारत » पर्व 1: आदि पर्व » अध्याय 129: कृपाचार्य, द्रोण और अश्वत्थामाकी उत्पत्ति तथा द्रोणको परशुरामजीसे अस्त्र-शस्त्रकी प्राप्तिकी कथा » श्लोक 48-49 |
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| | | | श्लोक 1.129.48-49  | तच्छ्रुत्वान्तर्हितं भूतमन्तरिक्षस्थमब्रवीत्।
अश्वस्येवास्य यत् स्थाम नदत: प्रदिशो गतम्॥ ४८॥
अश्वत्थामैव बालोऽयं तस्मान्नाम्ना भविष्यति।
सुतेन तेन सुप्रीतो भारद्वाजस्ततोऽभवत्॥ ४९॥ | | | | | | अनुवाद | | यह सुनकर अन्तरिक्ष में स्थित किसी अदृश्य प्राणी ने कहा, ‘जब यह बालक चिल्लाया, तब इसकी घोड़े के समान आवाज सम्पूर्ण दिशाओं में गूंज उठी; इसलिए यह अश्वत्थामा नाम से प्रसिद्ध होगा।’ भरद्वाजनंदन द्रोण उस पुत्र पर बहुत प्रसन्न हुए ॥48-49॥ | | | | Hearing this, some invisible being situated in the space said, 'When this child cried out, his voice like that of a horse echoed in all directions; hence he will be famous by the name of Ashvatthama.' Bharadwajanandan Drona was very pleased with that son. ॥ 48-49॥ | | ✨ ai-generated | | |
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