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mahabharat 1.129.47: गौतमी कृपी को द्रोण से अश्वत्थामा नाम का पुत्र प्राप्त हुआ। वह बालक जन्म लेते ही घोड़े के समान शब्द करने लगा। 4 7॥   |   mahabharat अध्याय 1.129: कृपाचार्य, द्रोण और अश्वत्थामाकी उत्पत्ति तथा द्रोणको परशुरामजीसे अस्त्र-शस्त्रकी प्राप्तिकी कथा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 129: कृपाचार्य, द्रोण और अश्वत्थामाकी उत्पत्ति तथा द्रोणको परशुरामजीसे अस्त्र-शस्त्रकी प्राप्तिकी कथा  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  1.129.47 
अलभद् गौतमी पुत्रमश्वत्थामानमेव च।
स जातमात्रो व्यनदद् यथैवोच्चै:श्रवा हय:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
गौतमी कृपी को द्रोण से अश्वत्थामा नाम का पुत्र प्राप्त हुआ। वह बालक जन्म लेते ही घोड़े के समान शब्द करने लगा। 4 7॥
 
Gautami Kripi got a son named Ashwatthama from Drona. As soon as that child was born, he made a sound like a horse. 4 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)