Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.129.45-46: वे न केवल वेद-वेदांगों के विद्वान थे, बल्कि उन्होंने तपस्या द्वारा अपने समस्त पापों को भी भस्म कर दिया था। उनकी महान कीर्ति सर्वत्र फैल गई थी। एक बार पितरों ने उन्हें पुत्र प्राप्ति हेतु प्रेरित किया; अतः पुत्र प्राप्ति के लोभ में द्रोणाचार्य ने शरद्वान की पुत्री कृपी को पत्नी रूप में स्वीकार कर लिया। कृपी अग्निहोत्र, धार्मिक अनुष्ठानों और संयम में सदैव उनका साथ देती थीं। 45-46 | mahabharat अध्याय 1.129: कृपाचार्य, द्रोण और अश्वत्थामाकी उत्पत्ति तथा द्रोणको परशुरामजीसे अस्त्र-शस्त्रकी प्राप्तिकी कथा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वेदवेदाङ्गविद्वान् स तपसा दग्धकिल्बिष:।
तत: पितृनियुक्तात्मा पुत्रलोभान्महायशा:॥ ४५॥
शारद्वतीं ततो भार्यां कृपीं द्रोणोऽन्वविन्दत।
अग्निहोत्रे च धर्मे च दमे च सततं रताम्॥ ४६॥
अनुवाद
वे न केवल वेद-वेदांगों के विद्वान थे, बल्कि उन्होंने तपस्या द्वारा अपने समस्त पापों को भी भस्म कर दिया था। उनकी महान कीर्ति सर्वत्र फैल गई थी। एक बार पितरों ने उन्हें पुत्र प्राप्ति हेतु प्रेरित किया; अतः पुत्र प्राप्ति के लोभ में द्रोणाचार्य ने शरद्वान की पुत्री कृपी को पत्नी रूप में स्वीकार कर लिया। कृपी अग्निहोत्र, धार्मिक अनुष्ठानों और संयम में सदैव उनका साथ देती थीं। 45-46
He was not only a scholar of Vedas and Vedangas, but had also burnt all his sins through penance. His great fame had spread everywhere. Once the ancestors inspired him to have a son; so Dronacharya, in the greed of having a son, accepted Kripi, the daughter of Sharadvana, as his wife. Kripi always accompanied him in Agnihotra, religious rituals and self-control. 45-46.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥