भरद्वाजोऽपि भगवानारुरोह दिवं तदा।
तत्रैव च वसन् द्रोणस्तपस्तेपे महातपा:॥ ४४॥
अनुवाद
कुछ दिनों के पश्चात भगवान् भरद्वाज भी स्वर्गलोक को चले गए और महातपस्वी द्रोण ने उसी आश्रम में पुनः साधना आरम्भ कर दी ॥ 44॥
A few days later, Lord Bharadwaj also departed for heavenly abode and the great ascetic Drona resumed his spiritual practice at the same hermitage. ॥ 44॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥