श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 129: कृपाचार्य, द्रोण और अश्वत्थामाकी उत्पत्ति तथा द्रोणको परशुरामजीसे अस्त्र-शस्त्रकी प्राप्तिकी कथा  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  1.129.44 
भरद्वाजोऽपि भगवानारुरोह दिवं तदा।
तत्रैव च वसन् द्रोणस्तपस्तेपे महातपा:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
कुछ दिनों के पश्चात भगवान् भरद्वाज भी स्वर्गलोक को चले गए और महातपस्वी द्रोण ने उसी आश्रम में पुनः साधना आरम्भ कर दी ॥ 44॥
 
A few days later, Lord Bharadwaj also departed for heavenly abode and the great ascetic Drona resumed his spiritual practice at the same hermitage. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)