श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 129: कृपाचार्य, द्रोण और अश्वत्थामाकी उत्पत्ति तथा द्रोणको परशुरामजीसे अस्त्र-शस्त्रकी प्राप्तिकी कथा  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  1.129.41 
भरद्वाजसखा चासीत् पृषतो नाम पार्थिव:।
तस्यापि द्रुपदो नाम तदा समभवत् सुत:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
उन दिनों पृषत नाम के एक राजा महर्षि भारद्वाज के मित्र थे। उस समय उनके भी एक पुत्र था, जिसका नाम द्रुपद था॥ 41॥
 
In those days a king named Prishat was a friend of Maharishi Bharadwaj. He too had a son at that time, whose name was Drupada.॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)