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mahabharat 1.129.40: जनमेजय! अग्निवेश मुनि वास्तव में अग्नि के पुत्र थे। उन्होंने आग्नेय नामक उस महान अस्त्र की शिक्षा अपने गुरु के पुत्र भारद्वाजनन्दन द्रोण को दी थी। 40॥   |   mahabharat अध्याय 1.129: कृपाचार्य, द्रोण और अश्वत्थामाकी उत्पत्ति तथा द्रोणको परशुरामजीसे अस्त्र-शस्त्रकी प्राप्तिकी कथा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 129: कृपाचार्य, द्रोण और अश्वत्थामाकी उत्पत्ति तथा द्रोणको परशुरामजीसे अस्त्र-शस्त्रकी प्राप्तिकी कथा  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  1.129.40 
अग्नेस्तु जात: स मुनिस्ततो भरतसत्तम।
भारद्वाजं तदाग्नेयं महास्त्रं प्रत्यपादयत्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय! अग्निवेश मुनि वास्तव में अग्नि के पुत्र थे। उन्होंने आग्नेय नामक उस महान अस्त्र की शिक्षा अपने गुरु के पुत्र भारद्वाजनन्दन द्रोण को दी थी। 40॥
 
Janamejaya! Agnivesh Muni was actually the son of Agni. He taught that great weapon called Agneya to his Guru's son Bhardwajnandan Drona. 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)