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mahabharat 1.129.29: तब उन महान आचार्य द्रोण ने उन सबको शिष्य रूप में स्वीकार किया और उन्हें सम्पूर्ण धनुर्वेद की शिक्षा दी ॥29॥   |   mahabharat अध्याय 1.129: कृपाचार्य, द्रोण और अश्वत्थामाकी उत्पत्ति तथा द्रोणको परशुरामजीसे अस्त्र-शस्त्रकी प्राप्तिकी कथा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 129: कृपाचार्य, द्रोण और अश्वत्थामाकी उत्पत्ति तथा द्रोणको परशुरामजीसे अस्त्र-शस्त्रकी प्राप्तिकी कथा  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  1.129.29 
प्रतिजग्राह तान् सर्वान् शिष्यत्वेन महायशा:।
शिक्षयामास च द्रोणो धनुर्वेदमशेषत:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
तब उन महान आचार्य द्रोण ने उन सबको शिष्य रूप में स्वीकार किया और उन्हें सम्पूर्ण धनुर्वेद की शिक्षा दी ॥29॥
 
Then that great Acharya Drona accepted them all as disciples and taught them the entire Dhanurveda. 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)