धनुश्च सशरं त्यक्त्वा तथा कृष्णाजिनानि च।
स विहायाश्रमं तं च तां चैवाप्सरसं मुनि:॥ १२॥
जगाम रेतस्तत् तस्य शरस्तम्बे पपात च।
शरस्तम्बे च पतितं द्विधा तदभवन्नृप॥ १३॥
अनुवाद
ऋषि धनुष-बाण, काला मृगचर्म, आश्रम और अप्सरा को छोड़कर चले गए। उनका वीर्य सरकंडों के समूह पर गिरा। हे राजन! वहाँ गिरने से उनका वीर्य दो भागों में विभक्त हो गया॥12-13॥
The sage left behind the bow and arrow, the black deerskin, the hermitage and the Apsara and went away. His semen fell on a cluster of reeds. O King! On falling there, his semen got divided into two parts.॥12-13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥