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mahabharat 1.128.6-7: 'माता! वह कहाँ गया होगा? शुभे! मैं उसे यहाँ भी नहीं देख पा रही हूँ। वहाँ हमने बगीचे और वन का कोना-कोना भीमसेन को ढूँढ़ निकाला। फिर भी जब वीर भीमसेन हमें दिखाई नहीं दिए, तब सबने यही मान लिया कि वह हमसे पहले ही चला गया होगा॥6-7॥   |   mahabharat अध्याय 1.128: भीमसेनके न आनेसे कुन्ती आदिकी चिन्ता, नागलोकसे भीमसेनका आगमन तथा उनके प्रति दुर्योधनकी कुचेष्टा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 128: भीमसेनके न आनेसे कुन्ती आदिकी चिन्ता, नागलोकसे भीमसेनका आगमन तथा उनके प्रति दुर्योधनकी कुचेष्टा  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  1.128.6-7 
क्व गतो भविता मातर्नेह पश्यामि तं शुभे।
उद्यानानि वनं चैव विचितानि समन्तत:॥ ६॥
तदर्थं न च तं वीरं दृष्टवन्तो वृकोदरम्।
मन्यमानास्तत: सर्वे यातो न: पूर्वमेव स:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'माता! वह कहाँ गया होगा? शुभे! मैं उसे यहाँ भी नहीं देख पा रही हूँ। वहाँ हमने बगीचे और वन का कोना-कोना भीमसेन को ढूँढ़ निकाला। फिर भी जब वीर भीमसेन हमें दिखाई नहीं दिए, तब सबने यही मान लिया कि वह हमसे पहले ही चला गया होगा॥6-7॥
 
‘Mother! Where could he have gone? Shubhe! I am not able to see him here either. There we searched every nook and corner of the garden and forest for Bhimasena. Even then when we could not see the brave Bhima, everyone assumed that he must have left before us.॥ 6-7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)