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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 128: भीमसेनके न आनेसे कुन्ती आदिकी चिन्ता, नागलोकसे भीमसेनका आगमन तथा उनके प्रति दुर्योधनकी कुचेष्टा  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.128.5 
सोऽभ्युपेत्य तदा पार्थो मातरं भ्रातृवत्सल:।
अभिवाद्याब्रवीत् कुन्तीमम्ब भीम इहागत:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
उस समय अपने भाई से प्रेम करने वाले कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर अपनी माता के पास गए और उन्हें प्रणाम करके बोले, "माता! क्या भीमसेन यहाँ आये हैं?"॥5॥
 
At that time Yudhishthira, the son of Kunti, who loved his brother, went to his mother and after saluting her said, "Mother, has Bhimasena come here?"॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)