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mahabharat 1.128.41: पाण्डवों को भी यह सब ज्ञात हुआ और वे क्रोध से भर गये; फिर भी उन्होंने क्रोध प्रकट नहीं किया, क्योंकि उन्होंने विदुर की बात मान ली थी ॥41॥   |   mahabharat अध्याय 1.128: भीमसेनके न आनेसे कुन्ती आदिकी चिन्ता, नागलोकसे भीमसेनका आगमन तथा उनके प्रति दुर्योधनकी कुचेष्टा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 128: भीमसेनके न आनेसे कुन्ती आदिकी चिन्ता, नागलोकसे भीमसेनका आगमन तथा उनके प्रति दुर्योधनकी कुचेष्टा  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  1.128.41 
पाण्डवाश्चापि तत् सर्वं प्रत्यजानन्नमर्षिता:।
उद्भावनमकुर्वन्तो विदुरस्य मते स्थिता:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
पाण्डवों को भी यह सब ज्ञात हुआ और वे क्रोध से भर गये; फिर भी उन्होंने क्रोध प्रकट नहीं किया, क्योंकि उन्होंने विदुर की बात मान ली थी ॥41॥
 
The Pandavas too came to know of all this and were filled with anger. But still they did not show their anger because they followed Vidur's advice. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)