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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 128: भीमसेनके न आनेसे कुन्ती आदिकी चिन्ता, नागलोकसे भीमसेनका आगमन तथा उनके प्रति दुर्योधनकी कुचेष्टा  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  1.128.39 
विकारं न ह्यजनयत् सुतीक्ष्णमपि तद् विषम्।
भीमसंहनने भीमे अजीर्यत वृकोदरे॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि विष अत्यन्त तीव्र था, फिर भी वह उन्हें कोई हानि न पहुँचा सका। भयंकर शरीर वाले भीमसेन के पेट में वृक नामक अग्नि थी, इसलिए विष वहीं पच गया।
 
Though the poison was very strong, it could not cause any harm to them. Bhimasena, who had a terrible body, had a fire called Vrik in his stomach; hence the poison got digested there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)