Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.128.31: उनकी माता और उनके यशस्वी भाइयों ने उन्हें गले लगाया और एक दूसरे के प्रति अपने महान स्नेह के कारण, भीम के आगमन पर अपने सौभाग्य की प्रशंसा की और कहा, "कितना सौभाग्य! कितना सौभाग्य!" | mahabharat अध्याय 1.128: भीमसेनके न आनेसे कुन्ती आदिकी चिन्ता, नागलोकसे भीमसेनका आगमन तथा उनके प्रति दुर्योधनकी कुचेष्टा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तैश्चापि सम्परिष्वक्त: सह मात्रा नरर्षभै:।
अन्योन्यगतसौहार्दाद् दिष्टॺा दिष्टॺेति चाब्रुवन्॥ ३१॥
अनुवाद
उनकी माता और उनके यशस्वी भाइयों ने उन्हें गले लगाया और एक दूसरे के प्रति अपने महान स्नेह के कारण, भीम के आगमन पर अपने सौभाग्य की प्रशंसा की और कहा, "कितना सौभाग्य! कितना सौभाग्य!"
Their mother and their illustrious brothers embraced them, and out of their great affection for one another, they all praised their good fortune at Bhima's arrival and said, "What a good fortune! What a good fortune!"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥