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mahabharat 1.128.30: तत्पश्चात् शत्रुमर्दन भीम ने अपनी माता और बड़े भाई को प्रणाम किया और स्नेहपूर्वक अपने छोटे भाइयों के सिरों को सूँघा ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 1.128: भीमसेनके न आनेसे कुन्ती आदिकी चिन्ता, नागलोकसे भीमसेनका आगमन तथा उनके प्रति दुर्योधनकी कुचेष्टा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 128: भीमसेनके न आनेसे कुन्ती आदिकी चिन्ता, नागलोकसे भीमसेनका आगमन तथा उनके प्रति दुर्योधनकी कुचेष्टा  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  1.128.30 
ततोऽभिवाद्य जननीं ज्येष्ठं भ्रातरमेव च।
कनीयस: समाघ्राय शिर:स्वरिविमर्दन:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् शत्रुमर्दन भीम ने अपनी माता और बड़े भाई को प्रणाम किया और स्नेहपूर्वक अपने छोटे भाइयों के सिरों को सूँघा ॥30॥
 
Thereafter, Shatrumardan Bhima bowed to his mother and elder brother and affectionately smelled the heads of his younger brothers. 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)