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mahabharat 1.128.23: 'आज तुम इस दिव्य जल में स्नान करो और अपने घर लौट जाओ। कुरुश्रेष्ठ! तुम्हारे बिना तुम्हारे सभी भाई निरंतर दुःख और चिंता में डूबे रहते हैं।'॥23॥   |   mahabharat अध्याय 1.128: भीमसेनके न आनेसे कुन्ती आदिकी चिन्ता, नागलोकसे भीमसेनका आगमन तथा उनके प्रति दुर्योधनकी कुचेष्टा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 128: भीमसेनके न आनेसे कुन्ती आदिकी चिन्ता, नागलोकसे भीमसेनका आगमन तथा उनके प्रति दुर्योधनकी कुचेष्टा  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.128.23 
गच्छाद्य त्वं च स्वगृहं स्नातो दिव्यैरिमैर्जलै:।
भ्रातरस्तेऽनुतप्यन्ति त्वां विना कुरुपुङ्गव॥ २३॥
 
 
अनुवाद
'आज तुम इस दिव्य जल में स्नान करो और अपने घर लौट जाओ। कुरुश्रेष्ठ! तुम्हारे बिना तुम्हारे सभी भाई निरंतर दुःख और चिंता में डूबे रहते हैं।'॥23॥
 
'Today you take a bath in this divine water and return to your home. Best of the Kurus! Without you all your brothers are immersed in constant sorrow and worry.'॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)