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mahabharat 1.128.2-3: वहाँ से रथ, हाथी, घोड़े तथा अनेक प्रकार के वाहनों पर सवार होकर जाते हुए वे आपस में कह रहे थे कि भीमसेन हमसे आगे निकल गये हैं। पापी दुर्योधन भीमसेन को वहाँ न देखकर अत्यन्त प्रसन्न हुआ और अपने भाइयों के साथ नगर में प्रवेश किया।   |   mahabharat अध्याय 1.128: भीमसेनके न आनेसे कुन्ती आदिकी चिन्ता, नागलोकसे भीमसेनका आगमन तथा उनके प्रति दुर्योधनकी कुचेष्टा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 128: भीमसेनके न आनेसे कुन्ती आदिकी चिन्ता, नागलोकसे भीमसेनका आगमन तथा उनके प्रति दुर्योधनकी कुचेष्टा  »  श्लोक 2-3
 
 
श्लोक  1.128.2-3 
रथैर्गजैस्तथा चाश्वैर्यानैश्चान्यैरनेकश:।
ब्रुवन्तो भीमसेनस्तु यातो ह्यग्रत एव न:॥ २॥
ततो दुर्योधन: पापस्तत्रापश्यन् वृकोदरम्।
भ्रातृभि: सहितो हृष्टो नगरं प्रविवेश ह॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वहाँ से रथ, हाथी, घोड़े तथा अनेक प्रकार के वाहनों पर सवार होकर जाते हुए वे आपस में कह रहे थे कि भीमसेन हमसे आगे निकल गये हैं। पापी दुर्योधन भीमसेन को वहाँ न देखकर अत्यन्त प्रसन्न हुआ और अपने भाइयों के साथ नगर में प्रवेश किया।
 
Going from there on chariots, elephants, horses and many other types of vehicles, they were saying among themselves that Bhimasena has gone ahead of us. The sinful Duryodhan was very happy on not seeing Bhimasena there and entered the city with his brothers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)