Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.128.16: अतः सम्भव है कि वह क्रोध में आकर वीर भीमसेन को धोखा देकर मार डाले। यह चिन्ता मुझे व्याकुल कर रही है; मेरा हृदय जल रहा है॥16॥   |   mahabharat अध्याय 1.128: भीमसेनके न आनेसे कुन्ती आदिकी चिन्ता, नागलोकसे भीमसेनका आगमन तथा उनके प्रति दुर्योधनकी कुचेष्टा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 128: भीमसेनके न आनेसे कुन्ती आदिकी चिन्ता, नागलोकसे भीमसेनका आगमन तथा उनके प्रति दुर्योधनकी कुचेष्टा  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.128.16 
निहन्यादपि तं वीरं जातमन्यु: सुयोधन:।
तेन मे व्याकुलं चित्तं हृदयं दह्यतीव च॥ १६॥
 
 
अनुवाद
अतः सम्भव है कि वह क्रोध में आकर वीर भीमसेन को धोखा देकर मार डाले। यह चिन्ता मुझे व्याकुल कर रही है; मेरा हृदय जल रहा है॥16॥
 
‘Therefore it is possible that in anger he may deceive the brave Bhimasena and kill him. This worry has troubled me; my heart is burning.’॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)