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mahabharat 1.128.15: वह दुर्योधन की आँखों में सदैव काँटा बना रहता है। दुर्योधन क्रूर, क्रोधी, क्षुद्र, बल-लोलुप और निर्लज्ज है॥15॥   |   mahabharat अध्याय 1.128: भीमसेनके न आनेसे कुन्ती आदिकी चिन्ता, नागलोकसे भीमसेनका आगमन तथा उनके प्रति दुर्योधनकी कुचेष्टा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 128: भीमसेनके न आनेसे कुन्ती आदिकी चिन्ता, नागलोकसे भीमसेनका आगमन तथा उनके प्रति दुर्योधनकी कुचेष्टा  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.128.15 
न च प्रीणयते चक्षु: सदा दुर्योधनस्य स:।
क्रूरोऽसौ दुर्मति: क्षुद्रो राज्यलुब्धोऽनपत्रप:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
वह दुर्योधन की आँखों में सदैव काँटा बना रहता है। दुर्योधन क्रूर, क्रोधी, क्षुद्र, बल-लोलुप और निर्लज्ज है॥15॥
 
‘He is always a thorn in the eyes of Duryodhan. Duryodhan is cruel, ill-tempered, petty, greedy for power and shameless.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)