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mahabharat 1.128.14: 'उद्यान से सब लोग अपने-अपने भाइयों सहित यहाँ आ गए हैं, परंतु महाबाहु भीमसेन अकेले अभी तक मेरे पास नहीं लौटे हैं!॥14॥   |   mahabharat अध्याय 1.128: भीमसेनके न आनेसे कुन्ती आदिकी चिन्ता, नागलोकसे भीमसेनका आगमन तथा उनके प्रति दुर्योधनकी कुचेष्टा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 128: भीमसेनके न आनेसे कुन्ती आदिकी चिन्ता, नागलोकसे भीमसेनका आगमन तथा उनके प्रति दुर्योधनकी कुचेष्टा  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.128.14 
उद्यानान्निर्गता: सर्वे भ्रातरो भ्रातृभि: सह।
तत्रैकस्तु महाबाहुर्भीमो नाभ्येति मामिह॥ १४॥
 
 
अनुवाद
'उद्यान से सब लोग अपने-अपने भाइयों सहित यहाँ आ गए हैं, परंतु महाबाहु भीमसेन अकेले अभी तक मेरे पास नहीं लौटे हैं!॥14॥
 
'Everyone from the garden along with their brothers have come here, but the mighty-armed Bhima alone has not yet returned to me!॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)