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mahabharat 1.128.12-13: 'तुम अपने छोटे भाइयों के साथ शीघ्र ही उसका पता लगाने का प्रयत्न करो।' पुत्र के लिए चिन्ता से कुन्ती का हृदय दुःख रहा था। उसने अपने ज्येष्ठ पुत्र युधिष्ठिर से यह बात कही और विदुरजी को बुलाकर इस प्रकार कहा - 'भगवन्! मुझे भीमसेन दिखाई नहीं दे रहे हैं। वे कहाँ चले गए हैं?'॥ 12-13॥   |   mahabharat अध्याय 1.128: भीमसेनके न आनेसे कुन्ती आदिकी चिन्ता, नागलोकसे भीमसेनका आगमन तथा उनके प्रति दुर्योधनकी कुचेष्टा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 128: भीमसेनके न आनेसे कुन्ती आदिकी चिन्ता, नागलोकसे भीमसेनका आगमन तथा उनके प्रति दुर्योधनकी कुचेष्टा  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  1.128.12-13 
शीघ्रमन्वेषणे यत्नं कुरु तस्यानुजै: सह।
इत्युक्त्वा तनयं ज्येष्ठं हृदयेन विदूयता॥ १२॥
क्षत्तारमानाय्य तदा कुन्ती वचनमब्रवीत्।
क्व गतो भगवन् क्षत्तर्भीमसेनो न दृश्यते॥ १३॥
 
 
अनुवाद
'तुम अपने छोटे भाइयों के साथ शीघ्र ही उसका पता लगाने का प्रयत्न करो।' पुत्र के लिए चिन्ता से कुन्ती का हृदय दुःख रहा था। उसने अपने ज्येष्ठ पुत्र युधिष्ठिर से यह बात कही और विदुरजी को बुलाकर इस प्रकार कहा - 'भगवन्! मुझे भीमसेन दिखाई नहीं दे रहे हैं। वे कहाँ चले गए हैं?'॥ 12-13॥
 
'You should try to find him quickly along with your younger brothers.' Kunti's heart was aching with worry for her son. She told the above to her eldest son Yudhishthira and called Vidurji and said thus - 'Lord! I cannot see Bhimasena. Where has he gone?॥ 12-13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)