Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.128.10-11: 'जहाँ मैंने सोचा था कि भीमसेन सो रहे हैं, क्या किसी ने उन्हें मार डाला?' बुद्धिमान धर्मराज के ऐसा पूछने पर कुन्ती विलाप करने लगीं और घबराकर युधिष्ठिर से बोलीं, 'बेटा! मैंने भीम को नहीं देखा। वह मेरे पास आया ही नहीं।' | mahabharat अध्याय 1.128: भीमसेनके न आनेसे कुन्ती आदिकी चिन्ता, नागलोकसे भीमसेनका आगमन तथा उनके प्रति दुर्योधनकी कुचेष्टा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यत: प्रसुप्तं मन्येऽहं भीमं नेति हतस्तु स:।
इत्युक्ता च तत: कुन्ती धर्मराजेन धीमता॥ १०॥
हा हेति कृत्वा सम्भ्रान्ता प्रत्युवाच युधिष्ठिरम्।
न पुत्र भीमं पश्यामि न मामभ्येत्यसाविति॥ ११॥
अनुवाद
'जहाँ मैंने सोचा था कि भीमसेन सो रहे हैं, क्या किसी ने उन्हें मार डाला?' बुद्धिमान धर्मराज के ऐसा पूछने पर कुन्ती विलाप करने लगीं और घबराकर युधिष्ठिर से बोलीं, 'बेटा! मैंने भीम को नहीं देखा। वह मेरे पास आया ही नहीं।'
'Where I thought Bhimasena was sleeping, did someone kill him?' On being asked this by the wise Dharmaraj, Kunti started wailing and panicked and said to Yudhishthira, 'Son! I have not seen Bhima. He did not come to me at all.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥