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mahabharat 1.127.8: ‘दुर्योधन आदि कौरवों के अन्याय के कारण सम्पूर्ण पृथ्वी वीरों से रहित हो जाएगी; अतः तुम योग का आश्रय लेकर यहाँ से चले जाओ और योगनिष्ठ होकर तपस्यारूपी वन में निवास करो।॥8॥   |   mahabharat अध्याय 1.127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 127: पाण्डवों तथा धृतराष्ट्रपुत्रोंकी बालक्रीड़ा, दुर्योधनका भीमसेनको विष खिलाना तथा गंगामें ढकेलना और भीमका नागलोकमें पहुँचकर आठ कुण्डोंके दिव्य रसका पान करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.127.8 
कुरूणामनयाच्चापि पृथिवी न भविष्यति।
गच्छ त्वं योगमास्थाय युक्ता वस तपोवने॥ ८॥
 
 
अनुवाद
‘दुर्योधन आदि कौरवों के अन्याय के कारण सम्पूर्ण पृथ्वी वीरों से रहित हो जाएगी; अतः तुम योग का आश्रय लेकर यहाँ से चले जाओ और योगनिष्ठ होकर तपस्यारूपी वन में निवास करो।॥8॥
 
‘Due to the injustice of the Kauravas like Duryodhan, the entire earth will be devoid of brave men; therefore you should take refuge in Yoga and go away from here and live in a forest of penance, being devoted to Yoga.॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)